भोपाल में सीआईडी मुख्यालय की तीन दिवसीय फॉरेंसिक कार्यशाला का दूसरा दिन नमूनों के इर्द-गिर्द घूमा। विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव के निर्देशन में आयोजन चल रहा था। मार्गदर्शन में पुलिस उप महानिरीक्षक साकेत पाण्डेय, प्रशांत खरे और सहायक पुलिस महानिरीक्षक मनीष खत्री थे।
आरएफएसएल भोपाल की पूनम सिंह ने भौतिक साक्ष्य और आवाज़ के नमूने बताए—कैसे उठाएँ, कैसे रखें, कैसे प्रयोगशाला भेजें। राजीव दुआ ने रसायन और विष की शुद्धता पर जोर दिया। कमलेश कैथोलिया ने रक्त, बाल, लार जैसे जैविक साक्ष्य, चेन ऑफ कस्टडी और डीएनए प्रोफाइलिंग जोड़ी।
घटनास्थल की किट में क्या है?
जिला सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट की प्रीति गायकवाड ने क्राइम सीन किट दिखाई। प्राथमिकता क्या उठे, क्या न छुए, दस्तावेज कैसे बने। सागर की राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला से रामदा कनेश ने आग्नेयास्त्र, कारतूस, गोली और जीएसआर का संरक्षण बताया।
हम प्रयोगशाला क्यों नहीं दिखा रहे?
जनसंपर्क की तस्वीर सभागार के मंच की है। आगे बैजे लगे अधिकारी, पीछे प्रोजेक्टर। यह बेंच का दृश्य नहीं। समापन 3 सितंबर को तय था, जब सीआईडी फोटोग्राफी शाखा के अमिताभ तिवारी घटनास्थल फोटोग्राफी बताते। हम मंच को लैब नहीं कहते।
मुख्य बातें
- दूसरे दिन आरएफएसएल भोपाल के वैज्ञानिकों ने भौतिकी, विष विज्ञान और डीएनए पर सत्र लिए।
- सागर की राज्य प्रयोगशाला से रामदा कनेश ने बैलिस्टिक साक्ष्य समझाया।
- समापन 3 सितंबर को तय था; यह लेख दूसरे दिन तक सीमित है।
स्रोत और संदर्भ
- मध्य प्रदेश जनसंपर्क · तीन दिवसीय फॉरेंसिक प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण ↗2 सितंबर 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



