जंगल में किस समय कौन सक्रिय है, यह उसके नक्शे जितना ही उपयोगी सवाल है। संजय टाइगर रिजर्व के अध्ययन में गर्मियों के दौरान रीछ और इंसान की दैनिक सक्रियता के घंटे सर्दियों की तुलना में ज्यादा मिलते पाए गए। जून 2022 में प्रकाशित शोध ने कैमरा ट्रैप के सहारे मौसम, जगह और समय को साथ पढ़ा। इसका क्षेत्र सीधी-शहडोल में फैले रिजर्व का कोर हिस्सा था।

दिसंबर 2016 से अप्रैल 2017 और जनवरी से अप्रैल 2018 के दौरान चार वर्ग किलोमीटर के खानों में क्रमशः 143 और 144 कैमरा-स्थल रखे गए। कैमरे किसी जीव के गुजरने पर उसकी तस्वीर और समय दर्ज करते हैं। इन अभिलेखों से दोनों की सक्रियता के घंटों का वितरण तैयार किया गया। गर्मियों में समय का मेल ज्यादा निकला, जबकि समान स्थानों पर मौजूदगी का मेल सर्दियों में ज्यादा था। यानी समय और जगह दोनों अलग-अलग जानकारी दे रहे थे।

पुराने रिकॉर्ड से संभावित इलाके

वन विभाग के अभिलेखों में 2009 से 2019 तक कोर क्षेत्र में रीछ के हमलों की 57 घटनाएँ दर्ज थीं। अधिकतर में GPS स्थान नहीं था। इसलिए शोधकर्ताओं ने संबंधित वन-कंपार्टमेंट, यानी विभागीय वनखंड, का केंद्र लिया। इन अनुमानित स्थानों से बना मॉडल इलाके के स्तर पर संकेत देता है; उसे किसी सटीक मांद या पगडंडी की पहचान की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अध्ययन के समय कोर में 39 गाँव दर्ज थे।

फलदार पेड़ों का संबंध

इसी दल के दिसंबर 2022 के अलग अध्ययन में 5,950 कैमरा-रातों का विश्लेषण हुआ। एक कैमरे का एक रात काम करना एक कैमरा-रात है। 143 स्थलों में 76 पर रीछ की तस्वीरें आईं। फलदार पेड़ों के अधिक घनत्व का संबंध कैमरे में रीछ दर्ज होने की संभावना से मिला। तस्वीरें गिने जाने और अलग-अलग जानवरों की आबादी गिने जाने में फर्क है।

दोनों शोध संरक्षण की योजना में मौसम और लोगों की आवाजाही को शामिल करने का आधार देते हैं। भोजन वाले पेड़, गाँव से दूरी और जंगल के अलग हिस्सों का इस्तेमाल साथ देखने पर यह समझ अधिक स्पष्ट होती है कि भालू और लोगों की गतिविधियाँ कहाँ और कब पास आती हैं।

मुख्य बातें

  • 2016–18 के दो सर्वे सत्रों में कोर क्षेत्र के 143 और 144 स्थलों पर कैमरे लगे।
  • गर्मी में दोनों की सक्रियता के घंटों का मेल अधिक था; समान जगहों पर दर्ज होने का मेल सर्दी में अधिक मिला।
  • वन विभाग की 2009–2019 की 57 घटनाएँ भी अध्ययन में शामिल थीं; अधिकतर में सटीक GPS स्थान उपलब्ध नहीं था।

स्रोत और संदर्भ

  1. Frontiers in Conservation Science · Spatio-Temporal Patterns and Source-Dispersion Modeling Towards Sloth Bear–Human Conflict Management in Central India ↗17 जून 2022
  2. PeerJ · N-mixture model-based estimate of relative abundance of sloth bear (Melursus ursinus) in response to biotic and abiotic factors in a human-dominated landscape of central India ↗6 दिसंबर 2022

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें