5 जनवरी 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला में दो सुविधाएँ खोलीं। एक राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला, जिसे विश्व की दूसरी बताया गया। दूसरी सौर सेल कैलिब्रेशन की राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सुविधा, जिसे विश्व में पाँचवीं कहा गया। दोनों एनपीएल के 80वें स्थापना दिवस पर दिल्ली में खुलीं।
पर्यावरण प्रयोगशाला का वादा सीधा है। हवा मापने वाले यंत्र अब भारतीय जलवायु में जाँचे और प्रमाणित किए जा सकेंगे। मंत्री ने कहा इससे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के आँकड़े अधिक पारदर्शी हो सकते हैं। नियामक, उद्योग और स्टार्टअप एक निशान से यंत्र मिला सकेंगे।
सूरज की नाप कितनी सख्त?
सौर सुविधा जर्मनी के पीटीबी के सहयोग से बनी है। लेजर आधारित डिफरेंशियल स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्सिविटी प्रणाली संदर्भ सौर सेल पर 0.35 प्रतिशत (k=2) अनिश्चितता का दावा करती है, जिसे विश्व में सबसे कम बताया गया। मकसद विदेशी प्रमाणन पर निर्भरता घटाना है। सीएसआईआर महानिदेशक एन. कलैसेल्वी ने पर्यावरण सुविधा को विश्व में पाँचवीं सबसे बड़ी और सौर सुविधा को दूसरी सर्वश्रेष्ठ कहा।
चित्र अलग साल का क्यों है?
साथ वाली तस्वीर 6 जून 2024 की है। श्यामल ने एनपीएल परिसर में ऊर्जा सामग्री परिसर और प्रकाशमिति प्रयोगशाला का भवन लिया। यह जनवरी 2026 के उद्घाटन कक्ष का आधिकारिक फोटो नहीं है। उसी दिन चौदह फाइटोकेमिकल भारतीय निर्देशक द्रव्य और कुछ गैस व सिलिका फ्यूम बीएनडी भी जारी हुए।
मुख्य बातें
- 5 जनवरी 2026 को एनपीएल के 80वें स्थापना दिवस पर एनईएसएल और सौर सेल प्राथमिक मानक सुविधा का उद्घाटन हुआ।
- सौर सेल कैलिब्रेशन जर्मनी के पीटीबी के सहयोग से है; अनिश्चितता 0.35 प्रतिशत (k=2) बताई गई।
- प्रकाशित परिसर चित्र जून 2024 का है, जनवरी 2026 के उद्घाटन का नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- पत्र सूचना कार्यालय · National Environmental Standard Laboratory marks a major leap in environmental governance ↗5 जनवरी 2026
- विकिमीडिया कॉमन्स · Energy materials complex and photometry laboratory in CSIR NPL, Delhi ↗6 जून 2024
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



